Friday, March 20, 2026
भयभीत होकर काम कर रहें हैँ अधिवक्ता
नवादा की जिला सत्र न्यायाधीश का निधन
वरीय अधिवक्ता अंशुल राज पटना हाई कोर्ट के जज नियुक्त
पटना सिविल कोर्ट बम से उड़ाने की फिर मिली धमकी
न्यायमूर्ति श्री सुधीर सिंह का तबादला हुआ पटना हाई कोर्ट
भारत का ऑपरेशन सिन्दूर" ,पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानो पर एयर स्ट्राइक
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता गये हड़ताल पर
चार न्यायिक पदाधिकारियों को दी गयी अनिवार्य सेवानिवृती
अधिवक्ता सुनील कुमार मिश्रा ने कर्मचारी से संघ खेली होली
जयपुर। परदेश की अदालतों की ओर से जारी होने वाली न्यायिक और प्रशासनिक आदेश में अब जाती का उल्लेख नहीं होगा। राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।आदेश में न्यायाधीश एसपी शर्मा के ४जुलाई २०१८ को बिशन बनाम सरकार के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है। बिशन को न्यायालय से जमानत मिली थी लेकिन दस्तावेज में जाती मेव लिखने में आ गई जबकि बिशन की जाति जाटव थी।इस कारण उसे जेल में ५दिन अतिरिक्त रहना पड़ा था।मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायाधीश एसपी शर्मा ने नाराजगी जताते हुए आदेश दिया था।इसमें जाति के उल्लेख को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री, अधीनस्थ अदालतों को अपने आदेश और पुलिस की गिरफ्तारी में जाति का उल्लेख नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।इस आदेश के लगभग २१महीने बाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने सोमवार को देर रात प्रशासनिक आदेश जारी किया। Lawkhabar की टीम की ओर से आप सभी से निवेदन है कि लॉकडाउन का पालन करें सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें सावधानी बरतें।